Published on: March 27, 2025
श्रीकृष्ण को अर्पित किए जाने वाले 56 भोग (छप्पन भोग) का महत्व
हिंदू धर्म में देवी-देवताओं को भोग अर्पित करने की परंपरा है। हालांकि, श्रीकृष्ण को चढ़ाया जाने वाला भोग अनोखा है क्योंकि इसमें 56 प्रकार के व्यंजन होते हैं, जिसे छप्पन भोग कहा जाता है। यह संख्या 56 कैसे तय हुई? इसके पीछे एक रोचक पौराणिक कथा है।
छप्पन भोग की पौराणिक कथा
प्राचीन काल में वृंदावन के ग्वालों द्वारा इंद्र देव की पूजा की जाती थी, क्योंकि वे वर्षा और जल के देवता माने जाते हैं। वर्षा के कारण ही अन्न और चारा उगता था, जिससे मनुष्य और पशु जीवित रहते थे।
लेकिन भगवान कृष्ण ने तर्क दिया कि ग्वालों का मुख्य आधार गाय और गोवर्धन पर्वत हैं, न कि इंद्र। अतः उन्होंने गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का सुझाव दिया। वृंदावनवासियों ने श्रीकृष्ण की बात मान ली और गोवर्धन पर्वत की पूजा आरंभ कर दी।
इंद्र इस अपमान से क्रोधित हो गए और उन्होंने भयंकर बारिश और तूफान भेजकर वृंदावन को जलमग्न करने का प्रयास किया। जब बारिश से बचने का कोई उपाय नहीं बचा, तो श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सभी ग्वालों और गायों को उसके नीचे शरण दी।
छप्पन भोग का संबंध 7 दिनों से
श्रीकृष्ण ने सात दिनों तक लगातार गोवर्धन पर्वत को उठाए रखा, ताकि वृंदावनवासी सुरक्षित रहें। प्राचीन काल में दिन को प्रहरों में विभाजित किया जाता था। एक दिन में 8 प्रहर होते हैं, और माँ यशोदा प्रत्येक प्रहर में श्रीकृष्ण को भोजन कराती थीं।
- 1 दिन में कृष्ण 8 प्रहर भोजन करते थे।
- 7 दिन तक उन्होंने कुछ नहीं खाया।
- कुल 7 × 8 = 56 प्रहर हो गए।
जब बारिश समाप्त हुई और इंद्र ने अपनी हार स्वीकार कर ली, तब माँ यशोदा ने श्रीकृष्ण को 56 प्रकार के व्यंजन अर्पित किए, ताकि उनकी भूख मिट सके। तभी से छप्पन भोग की परंपरा चली आ रही है।
छप्पन भोग में शामिल प्रमुख व्यंजन
छप्पन भोग में विभिन्न प्रकार के मीठे और नमकीन व्यंजन होते हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- मिठाइयाँ: पेड़ा, लड्डू, जलेबी, हलवा, घेवर
- दूध से बने पदार्थ: माखन, मलाई, दही, पनीर
- अन्य व्यंजन: पूड़ी, कचौड़ी, दाल, खिचड़ी, चावल, सब्जियाँ
छप्पन भोग का आध्यात्मिक महत्व
छप्पन भोग सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि भक्ति का प्रतीक है। यह कृष्ण भक्ति और उनकी लीलाओं को स्मरण करने का माध्यम है। विभिन्न मंदिरों में विशेष रूप से गोवर्धन पूजा, जन्माष्टमी और अन्नकूट उत्सव के दौरान छप्पन भोग अर्पित किया जाता है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. छप्पन भोग कब और क्यों चढ़ाया जाता है?
छप्पन भोग विशेष रूप से गोवर्धन पूजा, जन्माष्टमी और अन्नकूट के अवसर पर श्रीकृष्ण को अर्पित किया जाता है। यह गोवर्धन पर्वत उठाने की उनकी लीला से जुड़ा है।
2. छप्पन भोग में कितने प्रकार के व्यंजन होते हैं?
छप्पन भोग में 56 प्रकार के व्यंजन होते हैं, जिनमें मिठाइयाँ, दूध से बने पदार्थ, पूड़ी-कचौड़ी, सब्जियाँ और अन्य पारंपरिक व्यंजन शामिल होते हैं।
3. छप्पन भोग की परंपरा कैसे शुरू हुई?
यह परंपरा तब शुरू हुई जब श्रीकृष्ण ने सात दिनों तक बिना भोजन किए गोवर्धन पर्वत को उठाया और माँ यशोदा ने उनके लिए 56 प्रकार के व्यंजन बनाए।