Published on: March 28, 2025
By: [BTI]
Location: Rajnandgaon, India
गणगौर उत्सव की रौनक राजनांदगांव में

राजनांदगांव में इन दिनों गणगौर उत्सव की धूम मची हुई है। शहर की गलियों और बाग-बगीचों में राजस्थानी पारंपरिक गीतों के साथ महिलाएं और युवतियां उल्लास से भाग ले रही हैं। इस उत्सव में 20-25 या उससे अधिक की टोलियां देखी जा सकती हैं, जो पारंपरिक वेशभूषा में नजर आती हैं।
गणगौर अब केवल राजस्थानी समुदाय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह अन्य समुदायों में भी लोकप्रिय हो गया है। यह पर्व महिलाओं की दोस्ती और आपसी सौहार्द्र का प्रतीक बन चुका है।
गणगौर उत्सव का महत्व
गणगौर पूजा भगवान शंकर और माता पार्वती की आराधना का पर्व है। इसे छत्तीसगढ़ के गौरा-गौरी उत्सव के समान माना जाता है।
संस्कृति शर्मा, जो इस पर्व में सक्रिय भाग लेती हैं, कहती हैं:
गणगौर पर्व की धार्मिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान भोलेनाथ को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया। इसी कारण गणगौर में गण (शंकर) और गौर (पार्वती) की पूजा की जाती है।

राजनांदगांव में गणगौर शोभा यात्राएं
शहर में गणगौर के अवसर पर विभिन्न स्थलों से विशाल शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। प्रमुख स्थानों से निकलने वाली शोभायात्राएं:
- बाबा रामदेव मंदिर: यहां सुबह-शाम कन्याओं की भारी भीड़ रहती है।
- महेश्वरी भवन: 31 मार्च को भव्य गणगौर शोभायात्रा निकलेगी।
- महालक्ष्मी मंदिर: यहां 16 दिन तक गणगौर की धूम रहती है।
- अग्रसेन भवन: मारवाड़ी समाज की महिलाओं और युवतियों के लिए खास आयोजन।
राजस्थान में गणगौर की ऐतिहासिक शोभायात्राएं
गणगौर का उत्सव राजस्थान के जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, नागौर और अजमेर में भी धूमधाम से मनाया जाता है। इन शहरों में ऐतिहासिक गणगौर जुलूस और शोभायात्राएं निकाली जाती हैं, जो इस पर्व की भव्यता को दर्शाती हैं।

FAQs: गणगौर उत्सव से जुड़े सामान्य प्रश्न
गणगौर उत्सव कब मनाया जाता है?
गणगौर उत्सव होली के अगले दिन से शुरू होता है और 16 दिन तक चलता है।
गणगौर पूजा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस पूजा का मुख्य उद्देश्य सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र की कामना करना और कुंवारी कन्याओं द्वारा अच्छे वर की प्राप्ति के लिए पूजा करना है।
गणगौर में कौन-कौन से पारंपरिक गीत गाए जाते हैं?
गणगौर उत्सव में “ईसर गणगौर री सवारी”, “गणगौर माते आओ” जैसे पारंपरिक गीत गाए जाते हैं।